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गाजीपुर।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति को अधिकारी ठेंगा दिखा रहे है।भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के कड़े निर्देश के बावजूद विभागो में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
गाजीपुर बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार इस कदर व्याप्त हैं कि बिना रुपए लिए एरियर और ग्रेच्युटी और अध्यापकों के बकाया वेतन का भुगतान नही होता है।बकायदा लेखा कार्यालय में अध्यापकों के सभी बकाया भुगतान के लिए रेट निर्धारित किया गया है।68000 शिक्षक भर्ती,69000 शिक्षक भर्ती,16000 शिक्षक भर्ती के अध्यापकों के सम्पूर्ण सत्यापन के बाद वेतन भुगतान में भी खूब धनउगाही हुई है।वित्त और लेखा कार्यालय द्वारा पिछले 2 वर्षो में किए गए अध्यापकों के बकाया भुगतान को निष्पक्ष जांच करा दी जा तो व्यापक स्तर पर धनउगाही और अध्यापकों के शोषण की कलई खुल जायेगी।
हाईकोर्ट के निर्देश पर शिक्षको के 60 साल से पहले मृत्यु पर दिया जाने वाला ग्रेच्युटी भुगतान पर जमकर कमीशनखोरी का खेल खेला जा रहा है,विश्वस्त सूत्रों के हवाले से और नाम न छापने के शर्त पर उत्पीड़न के शिकार हुए लोगों ने बताया कि भुगतान पर वित्त एवं लेखाधिकारी और पटल सहायक द्वारा 5 से 10% तक कमीशन लिया जा रहा है,लोग मौन साधकर कमीशन देकर अपना भुगतान कराने के लिए मजबूर है।नाम न छापने की शर्त पर कुछ परिषदीय मृतक शिक्षको के परिजनों ने बताया हम लोगो से 10-10 % कमीशन लेकर भुगतान किया गया नही देने पर कुछ कमी दिखाकर भुगतान को रोकने की बात की जाती है।मालूम हो कि हर ब्लॉक से 8-10 लोगो का ग्रेच्युटी भुगतान किया गया है।
अबतक जिले में कुल 80 प्रतिशत भुगतान हो चुका है।
ग्रेच्युटी भुगतान शिक्षक के मृत्यु के समय साथ में मंहगाई भत्ते को जोड़कर ग्रेच्युटी भुगतान छमाही सेवा पर बनाता है।
जानिए क्या है ग्रेच्युटी भुगतान
शिक्षको को उनके 60 वर्ष की उम्र से पहले मृत्यु होने या इससे पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी भुगतान सेवाकाल के दौरान उसके मृत्यु के समय मूलवेतन साथ में मंहगाई भत्ता उसकी सेवा पर ग्रेच्युटी छमाही सेवा पर भुगतान किया जाता है।
इस तरह से होता है ग्रेच्युटी का भुगतान भुगतान
60 वर्ष की आयु का विकल्प दिए जाने पर शिक्षक को अधिकतम 20 लख रुपए तक ग्रेच्युटी दी जाएगी इसमें उसकी सेवा अवधि की गणना होती है इसमें 1 वर्ष से कम, 1 से 5 वर्ष, 5 से 11 वर्ष, 11 से 20 वर्ष व अंत में 20 वर्ष या उससे अधिक सेवा के आधार पर तय स्लैब के अनुसार भुगतान किया जाता है।
जिम्मेदार बोले
इस विषय पर जब वित्त एवं लेखाधिकारी अभिषेक यादव से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने मोबाइल फोन काटकर व्यस्त कर दिया गया।